Onion Siddhi Red








Description
प्याज की खेती के लिए ज़रूरी जलवायु
प्याज की खेती के लिए उपयोगी मिट्टी
प्याज की खेती का सही समय
प्याज की खेती की तैयारी कैसे करें
प्याज की खेती में ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातें
प्याज की उन्नत किस्में
प्याज की खेती में सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन
The Agriculture Seeds Producer Company
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Product Specifications:
हजारों वर्षों से प्याज भारतीय खान पान का एक अभिन्न अंग रहा है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक किसी ना किसी रूप में प्याज (onion) हमारी थाली की शोभा बढ़ाता है। व्यंजनों में प्याज का अपना एक विशिष्ट स्थान है। प्याज में कई औषधीय गुण होते हैं। इसे सलाद, सब्जी, अचार और मसाले की तरह भी खाया जाता है। प्याज में गंधक पाया जाता है। इसी वजह से प्याज में गंध और तीखापन होता है। इसके उपयोग से नसों में खून के प्रवाह में बाधा पैदा नहीं होती है।
भारत के साथ साथ विदेशों में भी बड़ी मात्रा में पूरे वर्ष ही इसकी मांग बनी रहती है। भारत के कई प्रांतों में प्याज की खेती (onion ki kheti) किसानों की खुशहाली, समृद्धि और आय वृद्धि का कारण बनी है। ऐसे में देश के किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर प्याज की खेती (pyaj ki kheti) करके अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
प्याज की खेती (pyaj ki kheti) समशीतोष्ण प्रदेश में खूब होती है। लेकिन इसे उष्णकटिबंधीय जलवायु में भी लगाया जा सकता है। इसके लिए 50-80 सेंटीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। हल्के गर्म मौसम में इसकी अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। प्याज की फसल 13-24 डिग्री सेल्सियस की तापमान में अच्छी तरह से पनपती है। बीज अंकुरण के लिए 20-30° सेंटीग्रेड का तापमान बेहतर होता है। फसल वृद्धि के लिए 13-23 सेंटीग्रेड और कन्द बनने की प्रक्रिया के लिए 15-25 °सेंटीग्रेड अनुकूल होता है।
वैसे लगभग भारत के सभी राज्यों में इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। अच्छी तरह से जल निकासी सुविधाओं के साथ लाल दोमट और काली मिट्टी प्याज की खेती के लिए सबसे उपयुक्त हैं। जीवांशयुक्त हल्की दोमट मिट्टी में इसकी पैदावार खूब होती है। अधिक अम्लीय और क्षारीय मिट्टी में प्याज की खेती (pyaj ki kheti) करने से बचना चाहिए। प्याज लगाने से पूर्व मिट्टी की जांच करा लेनी चाहिए। 6.5 से 7.5 पीएच मान वाली मिट्टी मे उपयुक्त है |
एक हेक्टेयर खेत में 20 से 25 तक गोबर की खाद रोपाई से एक माह पूर्व ही खेत में मिला देना चाहिए। अच्छे उत्पाद के लिए प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किग्रा पोटाश की आवश्यकता पड़ती है। गंधक और जिंक की कमी होने पर ही उपयोग करें।
प्याज की खेती (pyaj ki kheti) किसान रबी और खरीफ दोनों मौसम में कर सकते हैं। खरीफ के मौसम में प्याज की खेती के लिए किसान अगस्त-सितंबर के प्रारंभिक सप्ताह में प्याज की रोपाई कर सकते हैं। यदि किसान रबी के मौसम में प्याज की उन्नत खेती करना चाहतें हैं तो उसके लिए जनवरी से फरवरी में प्याज की रोपाई कर सकते हैं। रबी की मौसम में प्याज की खेती करना काफी उत्तम समय होता है।
खरीफ की फसल तैयार करने के लिए प्याज की नर्सरी 15 जून से 15 जुलाई तक तैयार की जा सकती है तथा इसकी नर्सरी 40 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है तथा 35 से 40 दिनों की प्याज की पौध खेतों में रोपाई या रोपने के लायक हो जाती है।
यदि किसान रबी की फसल के लिए नर्सरी तैयार करते हैं तो नवंबर दिसंबर महीने में नर्सरी तैयार कर सकते है। रोपाई के लिए 40 से 45 दिनों बाद यानि जनवरी-फरवरी में प्याज की नर्सरी लगाने के लिए तैयार हो जाती है।
प्याज की खेती (pyaj ki kheti) की तैयारी करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आप रबी की फसल लेना चाहते हैं या खरीफ की फसल। प्याज की रोपाई करने से पहले खेत की 2-3 बार जुताई करके उसे समतल बना लें। खेत की पहली जुताई के समय ही गोबर या वर्मी कंपोस्ट की खाद मिलाकर पाटा चला लें।
किसान प्याज की रोपाई दो तरह से कर सकते हैं।
सूखी रोपाई
गीली रोपाई
सूखी रोपाई में खेत को समतल करने के बाद प्याज की पौधे को 10-15 सेंटीमीटर पर लगाएं। गीली रोपाई धान की रोपाई की तरह पानी वाले खेत में 10-15 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। ध्यान रहें सूखी रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें। पैदावार की दृष्टि से सूखी बुआई ही उपयुक्त होती है।
यदि किसान बीज लगाकर सीधी बुआई करता है तो फसल 120 से 140 दिन में तैयार होती है, जबकि नर्सरी से पौध लगता है तो 60 से 90 दिन में प्याज की फसल पूर्ण रूप से तैयार हो जाती है।
नर्सरी के लिए प्याज के बीज 3 से 3.5 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। रोपाई से पूर्व पौधों की जड़ों को कार्बेंडाजिम 9 प्रतिशत के घोल में डूबा देना चाहिए।
प्याज के सफल उत्पादन में भूमि की तैयारी का विशेष महत्व हैं। खेत की प्रथम जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करना चाहिए। इसके उपरांत 2 से 3 जुताई कल्टीवेटर या हैरा से करें, प्रत्येक जुताई के बाद पाटा अवश्य लगाएं जिससे नमी सुरक्षित रहें, साथ ही मिट्टी भुरभुरी हो जाए।
भूमि की तैयारी के साथ पौधशाला की भी तैयारी उतनी ही आवश्यक है। पौधशाला की तैयारी में ख़ास ध्यान देकर उसे खरपतवार से मुक्त कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें।
पौधशाला में जल जमाव नहीं हो इसका विशेष ध्यान दें। पौधशाला को छोटी क्यारियों में बांट दें। पौधशाला अपनी आवश्यकता अनुसार बनाएं।
किसी भी सब्जी के वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन में उसके किस्मों का अधिक महत्व है। हमारी मिट्टी के लिए कौन सा अनुशंसित किस्मों हैं इसका ध्यान रखना अधिक आवश्यक है।
हिसार-2
इस किस्म की प्याज में तीखापन कम होता है। इसकी भंडारण क्षमता अधिक होती है। फूल और डंठल कम निकलते हैं। फसल 130-145 दिन में पककर तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ लगभग 120 क्विंटल पैदावार होती है।
हिसार प्याज-3
इसमें भी तीखापन कम होता है। भंडारण की क्षमता अधिक होती है। इसकी खासियत यह है कि यह रोग प्रतिरोधि होती है। फसल 130-140 दिन में तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ 125 क्विंटल तक पैदावार होती है।
पूसा रेड
इस किस्म की फसल 125-140 दिन में तैयार होती है। प्रति एकड़ 100-120 क्विंटल पैदावार होती है।
इनके अलावा प्याज की एरीफाउंड लाइट रेड, एरीफाउंड वाइट, पूसा माधवी, एरीफाउंड डार्क रेड और एन-53 किस्में भी अच्छी मानी जाती हैं।
सिंचाई
प्याज एक ऐसी फसल है जिसमें बिचड़े की रोपनी के बाद यानि जब पौधे स्थिर हो जाते हैं तब इसमें निकौनी एवं सिंचाई की आवश्यकता पड़ती रहती है। इस फसल में अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसकी जड़ें 15-20 सेंटीमीटर सतह पर फैलती है। इसमें 5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए। अधिक गहरी सिंचाई न करें। पानी की कमी से खेतों में दरार न बन पाए। आरम्भ में 10-12 दिनों के अंतर पर सिंचाई करें। गर्मी आने पर 5-7 दिनों पर सिंचाई करें।
उर्वरक प्रबंधन
प्याज की बेहतर पैदावार के लिए उर्वरक प्रबंधन की जानकारी होना बेहद जरूरी है। संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों के प्रयोग से प्याज की अच्छी पैदावार होती है। प्याज की खेती के लिए खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ खेत में 3-4 टन कम्पोस्ट खाद, 20 किलोग्राम यूरिया, 36 किलोग्राम डीएपी एवं 30 किलोग्राम पोटाश मिला लेनी चाहिए। जब फसल 60-65 दिनों की हो जाए तो 30 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग कर सकते हैं।
अच्छी गुणवत्ता की प्याज लेने के लिए प्रति एकड़ भूमि में 10 किलोग्राम सल्फर एवं 2 किलोग्राम जिंक का भी प्रयोग करें।
प्याज की खेती (pyaj ki kheti) में अपार संभावनाएं हैं। प्याज की मांग बाजार में सालभर बनी रहती है। मंहगाई की दौरान प्याज ही लोगों को रुलाती है। ऐसे में प्याज के किसानों को अच्छा मुनाफा होता है।
लागत की बात करें तो प्याज की खेती (onion ki kheti) में 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का खर्च आता है। इस खेती से आप प्रति फसल 1.5 से 2 लाख रूपए आसानी से कमा सकते हैं।
महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, यूपी, बिहार, गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान इसके बड़े उत्पादक राज्य हैं।
देश में सालाना प्याज उत्पादन औसतन 2.25 से 2.50 करोड़ मीट्रिक टन के बीच है।
हर साल कम से कम 1.5 करोड़ मीट्रिक टन प्याज का निर्यात होता है।
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